बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: समाधान की दिशा में आगे बढ़ता भारत

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 29 जनवरी को संसद के बजट सत्र की शुरुआत से पूर्व संसद भवन परिसर में मीडिया को संबोधित किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण, बजट सत्र की महत्ता और देश के दीर्घकालिक विकास के दृष्टिकोण पर विचार साझा किए। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय व्यवधान का नहीं, बल्कि समाधान का है। उन्होंने सभी माननीय सांसदों से आग्रह किया कि संसद के इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान राष्ट्रहित में समाधानकारी निर्णयों को प्राथमिकता दी जाए।


राष्ट्रपति का अभिभाषण: आत्मविश्वास और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण को 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास और पुरुषार्थ की अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का संबोधन विशेष रूप से युवाओं की आकांक्षाओं को रेखांकित करता है और सभी सांसदों के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बजट सत्र कई दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 21वीं सदी का पहला चरण पूर्ण हो चुका है और अब दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है।

विकसित भारत 2047 की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगामी 25 वर्ष अत्यंत निर्णायक होंगे। इस अवधि में लिए जाने वाले नीतिगत निर्णय देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति की दिशा निर्धारित करेंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह बजट 21वीं सदी के दूसरे क्वार्टर का पहला बजट है, जो दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखेगा।

निरंतरता और स्थिरता का प्रतीक बजट
प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका लगातार नौवीं बार बजट प्रस्तुत करना भारत के संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह निरंतरता और नीतिगत स्थिरता का प्रतीक है।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत भारत के लिए सकारात्मक संकेतों के साथ हुई है। आज भारत वैश्विक स्तर पर आशा की किरण और निवेश के आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को भारत के उज्ज्वल आर्थिक भविष्य की झलक बताया।

गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा पर बल
प्रधानमंत्री मोदी ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि खुले वैश्विक बाजार में भारत की पहचान गुणवत्ता से बने। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट गुणवत्ता न केवल आर्थिक लाभ दिलाएगी, बल्कि भारतीय ब्रांड और देश की साख को भी मजबूत करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता किसानों, मछुआरों, युवाओं और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर लेकर आएगा।

रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म की प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की कार्यशैली ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के सिद्धांत पर आधारित रही है और अब देश ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अब दीर्घकालिक लंबित समस्याओं के समाधान पर है, जिससे नीतियों में पूर्वानुमेयता और वैश्विक विश्वास दोनों सुदृढ़ हो रहे हैं।

मानव-केंद्रित विकास का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के सभी निर्णय मानव-केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के उपयोग के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और लास्ट माइल डिलीवरी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत आज समाधान, सहयोग और समावेशी विकास के मार्ग पर अग्रसर है। बजट सत्र के माध्यम से लिए जाने वाले निर्णय विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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