भारतीय उत्पादों को नई पहचान: मेड इन इंडिया लेबल योजना

भारत सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है, ताकि भारतीय विनिर्माण (Manufacturing) को घरेलू और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सके। अब आपके सामने आ रहा है "मेड इन इंडिया लेबल", एक खास योजना जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर QR Code युक्त लेबल लगाया जाएगा। इस लेबल को स्कैन करते ही उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिल जाएगी कि यह उत्पाद कहाँ बना है, कब तक मान्य है और उसकी असली पहचान क्या है।


सरकार का कहना है कि यह योजना न सिर्फ “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत मिशन” को मज़बूती देगी, बल्कि उपभोक्ताओं का भारतीय ब्रांड्स पर भरोसा भी और मज़बूत बनाएगी।

क्यों है यह योजना खास?
-घरेलू उत्पादों की प्रामाणिकता और गुणवत्ता को उजागर करेगी।
-Made in India लेबल वाले उत्पादों की वैश्विक पहचान बनेगी।
-उपभोक्ताओं को निर्माण स्थल और उत्पाद की सत्यता जानने में आसानी होगी।
-देश के छोटे और बड़े उद्योगों—चाहे स्टील हो, टेक्सटाइल हो या इलेक्ट्रॉनिक्स—सभी को इसका फायदा मिलेगा।
-इस योजना के लिए सरकार ने तीन साल में 995 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।

कौन ले सकेगा लेबल? (Eligibility)

-वे निर्माता और उत्पादक जो अपने प्रोडक्ट्स का निर्माण या असेंबलिंग पूरी तरह या ज्यादातर भारत में करते हैं।
-हर सेक्टर के लिए तय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा करना ज़रूरी होगा।
-आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर ही होगा और डॉक्यूमेंट्स जमा करने के बाद अनुमति दी जाएगी।

कैसे करेगा काम QR कोड?
-लेबल में एक लोगो और QR कोड होगा।
जैसे ही उपभोक्ता स्कैन करेंगे—
- उस प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग लोकेशन,
-लेबल की वैधता,
-और प्रोडक्ट से जुड़ी अहम जानकारियाँ सामने आ जाएँगी।

अलग-अलग सेक्टर में प्रगति

*इस्पात (Steel):
2023 से कुछ बड़े स्टील उत्पादक इस लेबल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रांड इंडिया के तौर पर पहचान मिली।

*वस्त्र (Textiles):
2024 में QCI और KVIC के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हुए। अब खादी व MSME यूनिट्स भी इस लेबल के ज़रिए वैश्विक स्तर पर मज़बूत उपस्थिति दर्ज कर पाएंगे।

*इलेक्ट्रॉनिक्स:
अब इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर सभी जानकारियाँ QR कोड से उपलब्ध होंगी। इसका मतलब उपभोक्ता आसानी से प्रोडक्ट की असलियत जांच सकेगा।

क्यों जरूरी है ये कदम?
-भारत वैश्विक गुणवत्ता अवसंरचना सूचकांक (GQII) 2023 में 10वें स्थान पर है यानी भारत की मान्यता प्रणाली मज़बूत है।
-यह लेबल भारतीय उत्पादों को और भी Quality Assurance देगा।
-MSMEs, स्टार्टअप्स और ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रहे उद्यमियों को वैश्वीकरण (Global Reach) का मौका मिलेगा।

“Made in India Label” योजना सिर्फ एक लेबल नहीं, बल्कि भारत को एक सशक्त ब्रांड बनाने की ओर कदम है। चाहे इस्पात हो, वस्त्र या इलेक्ट्रॉनिक्स—हर क्षेत्र अब "भारत में निर्मित" का ठप्पा गर्व से लगाएगा।

इससे न सिर्फ घरेलू निर्माताओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि उपभोक्ता भी गर्व से कह सकेगा — “ये है Made in India!”

सोर्स पीआईबी

No comments:

Post a Comment

Popular Posts