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संविधान दिवस पर पीएम मोदी का पत्र: युवाओं और नागरिकों से कर्तव्य निभाने की अपील

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संविधान दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को एक भावनात्मक और प्रेरक पत्र लिखा है। 26 नवंबर को जारी किए गए इस पत्र में उन्होंने 1949 में संविधान के अंगीकार के ऐतिहासिक पल को याद करते हुए कहा कि भारत का संविधान ही देश की प्रगति और लोकतांत्रिक यात्रा की असली ताकत है। उन्होंने याद दिलाया कि 2015 में उनकी सरकार ने 26 नवंबर को संविधान दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया था, ताकि हर नागरिक संविधान के प्रति सम्मान और जुड़ाव महसूस करे।

पद्म पुरस्कार-2026 के लिए नामांकन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब 15 अगस्त 2025 तक नामांकन करें

सरकार ने पद्म पुरस्कार-2026 के लिए नामांकन/सिफारिशें जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 जुलाई, 2025 से 15 अगस्त, 2025 कर दिया है। पद्म पुरस्कार, जो भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं, हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर घोषित किए जाते हैं। इस निर्णय से अब उम्मीदवारों और सलाहकारों को अपनी योग्यताओं और सेवाओं को पत्र रूप में प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

मेरा गाँव मेरी धरोहर: गाँव-गाँव से जोड़ती भारत की सांस्कृतिक आत्मा

जब भी हम भारत की बात करते हैं, तो सबसे पहले जो छवि मन में उभरती है वो होती है – खेत-खलिहान, कच्ची गलियाँ, चौपाल पर बैठते बुजुर्ग और लोकगीतों की गूंज। यही तो असली भारत है – हमारा गाँव। और अब सरकार ने इस विरासत को बचाने और दुनिया तक पहुँचाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की है – "मेरा गाँव मेरी धरोहर" (MGMD)।

किसानों की आय दोगुनी करने का उद्देश्य: भारत सरकार की रणनीति और योजनाएँ

भारत सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का महत्वाकांक्षी विजन अपनाया है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन कर ग्रामीण समृद्धि और कृषि आधारित आय को सशक्त बनाना है। 22 जुलाई को कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसके लिए बहुआयामी योजनाओं, बजटीय समर्थन, और ठोस रणनीति का मार्गदर्शन किया गया है।

आपातकाल: भारत के लोकतंत्र की सबसे काली रात – 50 साल बाद याद करते हैं वो दिन

आज से ठीक 50 साल पहले, 25 जून 1975 की रात को देश में ऐसा फैसला लिया गया, जिसने भारत के लोकतंत्र की बुनियाद को झकझोर दिया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत "आंतरिक अशांति" का हवाला देकर आपातकाल लगाने की सिफारिश की, और आधी रात को देश की आजादी पर ताला जड़ दिया गया।