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केरल में परिवर्तन का शंखनाद: पीएम मोदी ने कहा- तिरुवनंतपुरम ने रखी भाजपा सरकार की नींव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जनवरी को केरल के तिरुवनंतपुरम में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य की सियासत में बड़े बदलाव का दावा किया है। पीएम ने कहा कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा की जीत कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि इसने केरल में भाजपा की अगली सरकार की नींव रख दी है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की जुगलबंदी करार दिया।

राहुल गांधी के नेतृत्व में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का पतन, क्या वे पार्टी के लिए अभिशाप बन गए हैं?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस—वह पार्टी जिसने देश पर दशकों तक शासन किया और देश के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक ढांचे पर गहरी छाप छोड़ी—आज अपने इतिहास के सबसे गहरे और दर्दनाक संकट से गुजर रही है। हालत यह है कि जब-जब चुनाव आते हैं, कांग्रेस की हार लगभग तय मानी जाती है। लोकसभा हो या विधानसभा या स्थानीय निकाय, हार की फेहरिस्त लगातार लंबी होती जा रही है। आज यह पार्टी केवल चुनाव नहीं हार रही, बल्कि अपनी पहचान, अपना प्रभाव और अपना आत्मविश्वास तीनों खोती जा रही है। 

बिहार चुनाव से पहले लालू परिवार को आईआरसीटीसी घोटाले में बड़ा झटका

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने सोमवार, 13 अक्टूबर को आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े एक अहम मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत 14 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप तय कर दिए।

पीएम मोदी ने बताया 24 वर्षों का सफर: गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक अहम उपलब्धि हासिल की है। आज के दिन से ठीक 24 साल पहले यानी 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। मंगलवार को उन्होंने अपने इस 25वें वर्ष के सफर का जश्न मनाते हुए देशवासियों का आभार जताया और अपने अनुभवों को साझा किया।

जेटली को लेकर राहुल के दावे पर सवाल! क्या राहुल गांधी भी केजरीवाल की राह पर जा रहे हैं?

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान को लेकर घिरे हुए हैं। इस बार उन्होंने देश के पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को लेकर ऐसी टिप्पणी की जिसे राजनीतिक हलकों में 'असंवेदनशील और अशोभनीय' बताया गया। यह पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने विवादित टिप्पणी की हो। इससे पहले भी वे कई बार अपने बयानों के कारण विवादों में फंस चुके हैं। इससे लगता है कि क्या राहुल गांधी भी अब विवादित- अनर्गल बयान देने के मामले में अरविंद केजरीवाल की राह पर चल पड़े हैं, जहां चौंकाने वाले बयान, सार्वजनिक आलोचना और बाद में माफी एक पैटर्न बन गया है? 

राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति: जब विदेशी मंच बन जाते हैं सरकार विरोध का हथियार

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लोकतंत्र की खूबी ही यह है कि हर नागरिक, और खासकर विपक्ष, सरकार की आलोचना कर सकता है। लेकिन जब एक राष्ट्रीय नेता भारत के अंदर की समस्याओं को विदेशी मंचों पर ले जाकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स को “सच” का प्रमाण बनाता है, और विदेशी नेताओं की राय को अपने देश की संसद और न्यायपालिका से ऊपर रखता है — तो यह सिर्फ आलोचना नहीं, राष्ट्रीय चेतना पर प्रहार बन जाता है।

ओएनडीसी: छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाकर, लागत घटाकर और ग्राहकों के विकल्प बढ़ाकर भारत के ई-कॉमर्स में क्रांति

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी- ONDC) ने भारत के ई-कॉमर्स परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव किया है। यह पहल न केवल छोटे एवं मध्यम व्यवसायों (MSME) को सशक्त बना रही है, बल्कि पारंपरिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की सीमाओं को तोड़कर खरीदारों के लिए अधिक विकल्प और प्रतिस्पर्धी मूल्य उपलब्ध करा रही है।

प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA): भारत का अब तक का सबसे बड़ा जनजातीय ग्राम विकास कार्यक्रम

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भारत की जनजातीय आबादी, जो प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर और विविधता की प्रतीक है, लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से वंचित रही है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान (PM-JUGA), जिसे धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान भी कहा जाता है, इसी सामाजिक असमानता को दूर करने की एक ऐतिहासिक पहल है। यह अभियान 2 अक्टूबर 2024 को शुरू किया गया और इसका उद्देश्य 63,000 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में रहने वाले 5 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाना है।

जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा: कारण, राजनीतिक समीकरण और जीवन परिचय

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अपने पद से अचानक इस्तीफा देकर देश की राजनीति में हलचल मचा दी। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन जब सभी की निगाहें सरकार और विपक्ष की रणनीतियों पर टिकी थीं, तब इस अप्रत्याशित निर्णय ने सभी को चौंका दिया। उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पूरा होने में अभी लगभग दो वर्ष शेष थे, ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि उन्होंने ऐसा निर्णय क्यों लिया?