राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति: जब विदेशी मंच बन जाते हैं सरकार विरोध का हथियार
लोकतंत्र की खूबी ही यह है कि हर नागरिक, और खासकर विपक्ष, सरकार की आलोचना कर सकता है। लेकिन जब एक राष्ट्रीय नेता भारत के अंदर की समस्याओं को विदेशी मंचों पर ले जाकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है, विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स को “सच” का प्रमाण बनाता है, और विदेशी नेताओं की राय को अपने देश की संसद और न्यायपालिका से ऊपर रखता है — तो यह सिर्फ आलोचना नहीं, राष्ट्रीय चेतना पर प्रहार बन जाता है।