भारत का वैश्विक डंका: अब 'ताकत' नहीं 'जिम्मेदारी' में भी दुनिया ने माना लोहा, RNI रैंकिंग में 16वें स्थान पर

दुनिया के मानचित्र पर भारत की पहचान अब सिर्फ एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, भारत अब एक 'जिम्मेदार राष्ट्र' के रूप में विश्व का नेतृत्व कर रहा है। नई दिल्ली में जारी रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (RNI) 2026 के ताजा आंकड़ों ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चौंका दिया है। 154 देशों की इस सूची में भारत ने 16वीं रैंक हासिल की है,

जबकि अमेरिका और चीन जैसे विकसित देश टॉप-50 से भी बाहर नजर आ रहे हैं।

क्यों खास है यह रैंकिंग?
अमूमन वैश्विक रैंकिंग सैन्य बजट या डॉलर की चमक पर आधारित होती हैं, लेकिन वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (WIF) का यह सूचकांक 'एथिकल गवर्नेंस' (नैतिक शासन) पर आधारित है। इसमें यह देखा गया कि कौन सा देश अपनी जनता के कल्याण और पर्यावरण के प्रति कितना जवाबदेह है।

पड़ोसी और पश्चिमी देश पिछड़े
रिपोर्ट के अनुसार, जहां भारत अपनी नैतिक साख के दम पर 16वें स्थान पर है, वहीं ग्लोबल पावर्स की स्थिति काफी कमजोर रही: कनाडा (45वां) और अमेरिका (66वां) अपनी रैंकिंग बचाने में नाकाम रहे। चीन (68वां) भारत के मुकाबले काफी पीछे छूट गया है। सूची में सिंगापुर को पहला, स्विट्जरलैंड को दूसरा और डेनमार्क को तीसरा स्थान मिला है।

3 साल का रिसर्च और 'ग्लोबल गुरु' की छवि
इस ऐतिहासिक रिपोर्ट को तैयार करने में JNU और IIM मुंबई के विद्वानों ने तीन साल तक शोध किया है। उद्घाटन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने स्पष्ट किया कि भारत का यह प्रदर्शन समावेशी विकास और नैतिक शासन की जीत है। जानकारों का मानना है कि यह इंडेक्स दुनिया के सोचने का तरीका बदल देगा और भारत की 'वैश्विक गुरु' वाली छवि को और पुख्ता करेगा।

क्या है 'नैतिक शासन' और किन मानकों पर टिकी है यह रैंकिंग?
रिस्पॉन्सिबल नेशंस इंडेक्स (RNI) केवल कागजी आंकड़ों पर नहीं, बल्कि उन चार मजबूत स्तंभों पर आधारित है जो एक देश को वास्तव में 'जिम्मेदार' बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने इन्हीं क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है:

1. नैतिक शासन (Ethical Governance): भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और आम नागरिक के प्रति प्रशासन की जवाबदेही।

2. सामाजिक कल्याण (Social Welfare): क्या विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है? इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता जैसे विषय शामिल हैं।

3. पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection): जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए उठाए गए कदम, रिन्यूएबल एनर्जी (सौर ऊर्जा आदि) का उपयोग और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल।

4. वैश्विक उत्तरदायित्व (Global Responsibility): संकट के समय दूसरे देशों की मदद करना, अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना और वैश्विक शांति में योगदान देना।

"भारत ने जिस तरह 'वसुधैव कुटुंबकम' के विचार को अपनी नीतियों में उतारा है, उसी का परिणाम है कि आज वह अमेरिका और चीन जैसे देशों से कहीं अधिक नैतिक और जिम्मेदार राष्ट्र बनकर उभरा है।"

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