महंगाई में राहत, निर्यात में उछाल – भारत की अर्थव्यवस्था सही दिशा में

बीते कुछ सालों में हम सबने महंगाई का बोझ महसूस किया है। सब्जियों से लेकर स्कूल की फीस तक, हर चीज महंगी होती गई। लेकिन अब एक अच्छी खबर है – जून 2025 के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई में तेज गिरावट आई है। और यही नहीं, भारत का निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यानी एक तरफ आम आदमी को राहत मिली है, तो दूसरी तरफ देश की कमाई भी बढ़ी है।


महंगाई में ऐतिहासिक गिरावट – जेब पर से बोझ हुआ हल्का
महंगाई को मापने के दो बड़े पैमाने होते हैं –
1. सीपीआई (CPI – Consumer Price Index) और
2. डब्ल्यूपीआई (WPI – Wholesale Price Index)।
-सीपीआई वह दर होती है जो बताती है कि आम लोग रोजमर्रा की चीजों पर कितना खर्च कर रहे हैं।
-डब्ल्यूपीआई थोक में बिकने वाली चीजों की कीमतों को मापता है।

Photo PIB

जून 2025 में सीपीआई महंगाई घटकर सिर्फ 2.10% पर आ गई, जो कि जनवरी 2019 के बाद सबसे कम है। ये गिरावट बताती है कि खाना-पीना, कपड़े, बिजली जैसी जरूरी चीजों की कीमतें अब काबू में हैं।

वहीं, डब्ल्यूपीआई में -0.13% की गिरावट दर्ज की गई है। मतलब थोक स्तर पर भी कीमतें कम हुई हैं। खाद्य वस्तुएं, तेल, गैस और धातुओं के दाम घटे हैं, जिससे सप्लाई चेन में भी राहत आई है।

किसानों और सरकार के प्रयासों का असर

-धान और गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है – चावल 1490.74 एलएमटी और गेहूं 1175.07 एलएमटी तक पहुंचा।
-सरकार ने स्टॉक सीमा लागू की, खुले बाजार में अनाज बेचा और आयात-निर्यात को संभालकर सप्लाई संतुलित की।
-टैक्स में राहत: सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स छूट दी गई, जिससे लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ी।
-रेपो रेट घटाकर 5.5% कर दी गई, जिससे लोन सस्ते हुए और अर्थव्यवस्था में स्थिरता आई।

निर्यात में भारत की धमाकेदार छलांग
महंगाई पर काबू पाने के साथ-साथ भारत ने निर्यात के मोर्चे पर भी कमाल किया है।

✅ 2025-26 की पहली तिमाही में कुल निर्यात 210.31 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 6% ज़्यादा है।
✅ सेवा निर्यात 98.13 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, यानी 11% की बढ़ोतरी।
✅ गहने-रत्न छोड़कर बाकी उत्पादों का निर्यात 7.23% बढ़ा है।
✅ इलेक्ट्रॉनिक्स, चाय, मीट, डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ा है – Make in India का असर दिख रहा है।

इसी दौरान आयात में बढ़ोतरी सिर्फ 4.38% रही, जिससे व्यापार घाटा 9.4% कम हुआ है। यह दिखाता है कि भारत अब ज्यादा बेच रहा है और कम खरीद रहा है – देश के लिए ये बहुत फायदेमंद है।

सरकार की प्रमुख योजनाएं जो निर्यात को दे रही हैं बढ़ावा
-नई विदेश व्यापार नीति (FTP 2023): ई-कॉमर्स और हाईटेक उत्पादों पर खास ज़ोर।
-RODTEP और ROSCTL योजनाएं: निर्यातकों को टैक्स और शुल्क की भरपाई।
-डिस्ट्रिक्ट as एक्सपोर्ट हब: हर जिले को स्पेशल प्रोडक्ट्स के लिए चिन्हित किया गया है।
-TIES और MAI योजनाएं: व्यापार इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने में मदद।
-राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और पीएम गतिशक्ति: ट्रांसपोर्ट और कनेक्टिविटी को आसान बनाया गया है।
-PLI योजनाएं: इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, ऑटो जैसे क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा।
-दुबई में ‘भारत मार्ट’: एमएसएमई को विदेशों में सस्ती पहुंच।
-ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: 42,000 से ज़्यादा पुराने नियम खत्म, 3700 से अधिक कानून गैर-अपराधीकरण की दिशा में।
-Trade Connect और Single Window System: आसान अप्रूवल और बेहतर नेटवर्किंग।
-65 MSME एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर: छोटे निर्यातकों को फाइनेंस, स्कीम और मार्केट की जानकारी।

नई दिशा की ओर भारत

आज जब पूरी दुनिया आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है, भारत में महंगाई काबू में है, निर्यात बढ़ रहा है और घरेलू उत्पादन को बल मिल रहा है। इसका फायदा सीधे-सीधे आम लोगों को मिल रहा है – एक तरफ चीजें सस्ती हो रही हैं, दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था और रोज़गार के मौके मजबूत हो रहे हैं। 2030 तक भारत के $7.3 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनने का अनुमान अब सिर्फ एक सपना नहीं रहा – यह एक स्पष्ट रास्ता बनता जा रहा है। सरकार की योजनाएं, उद्योगों की मेहनत और जनता की भागीदारी इस रास्ते को और तेज बनाएंगे।

सोर्स पीआईबी 

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