हर दाने की सुरक्षा, हर किसान की समृद्धि: मोदी सरकार की भंडारण क्रांति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का कृषि क्षेत्र आज नई ऊँचाइयों को छू रहा है। पहले जहाँ देश में अनाज तो खूब पैदा होता था, लेकिन उसे सहेजने के लिए समुचित भंडारण की कमी थी—वहीं आज, स्थिति बदल चुकी है। अब सरकार की सोच सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि संरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन तक विस्तृत हो चुकी है।


मोदी सरकार ने "हर दाने की सुरक्षा" को राष्ट्र निर्माण का आधार बना दिया है। खेतों में लहलहाती फसलें अब सीधे सुरक्षित गोदामों, कोल्ड स्टोरेज, साइलो, और संगठित आपूर्ति शृंखला के ज़रिए आपकी थाली तक पहुँच रही हैं। यह सिर्फ कृषि की नहीं, बल्कि एक नीतिगत क्रांति की कहानी है।

रिकॉर्ड उत्पादन, और उससे बड़ी ज़िम्मेदारी

भारत ने वर्ष 2024-25 में 353.96 मिलियन टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। इसमें 117.51 मिलियन टन गेहूं और 149.07 मिलियन टन चावल शामिल हैं। यह उपलब्धि जितनी गर्व की बात है, उतनी ही बड़ी चुनौती भी – क्योंकि अगर इन खाद्यान्नों को समय पर सही जगह सुरक्षित नहीं रखा गया, तो बड़ी मात्रा में नुकसान हो सकता है।

भंडारण: सिर्फ गोदाम नहीं, बल्कि कृषि सुरक्षा का आधार

1. FCI और राज्यों की केंद्रीकृत भंडारण क्षमता
भारत सरकार के तहत FCI और राज्य एजेंसियों के पास 917.83 लाख मीट्रिक टन की भंडारण क्षमता है। गेहूं और चावल जैसे अनाज को वैज्ञानिक ढंग से स्टील साइलो, प्लिंथ और बंद भंडारगृहों में संग्रहित किया जा रहा है।

2. शीतगृह (Cold Storages) – जल्दी सड़ने वाले उत्पादों की ढाल
भारत में 8815 शीतगृह हैं जिनकी कुल क्षमता 402.18 लाख मीट्रिक टन है। ये सब्जी, फल, दूध, मांस जैसे उत्पादों की ताजगी और पोषण को बनाए रखते हैं। इससे किसानों को फसल खराब होने के डर के बिना बाजार का इंतजार करने की ताकत मिलती है।

3. PACS – गांवों में भंडारण क्रांति की जड़ें

PACS यानी प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ, अब केवल कर्ज देने वाली संस्थाएँ नहीं रहीं। मोदी सरकार ने इन्हें मल्टी-सर्विस सेंटर में बदलने का संकल्प लिया है। अब ये 500 से 2000 मीट्रिक टन तक की भंडारण क्षमता से किसानों को गाँव के पास ही उपज रखने की सुविधा देती हैं।

सरकारी योजनाएँ – सोच से संरचना तक
कृषि अवसंरचना कोष (AIF)

2020 में शुरू हुई इस योजना से 1.27 लाख परियोजनाओं को 73155 करोड़ रुपये मंजूर हो चुके हैं। इनमें भंडारगृह, शीतगृह, पैकिंग यूनिट जैसे ढाँचे शामिल हैं।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY)

इस योजना से 1600+ परियोजनाओं के तहत 255.66 लाख मीट्रिक टन की प्रसंस्करण और भंडारण क्षमता विकसित की गई है। इसका असर सीधे किसानों की आय और फसल की शेल्फ लाइफ पर पड़ा है।

कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी योजना

सरकार 35% से 50% तक सब्सिडी दे रही है ताकि किसानों और उद्यमियों को वैज्ञानिक भंडारण अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना (PACS आधारित)
2023 में शुरू हुई यह योजना PACS स्तर पर भंडारगृह, कस्टम हायरिंग सेंटर और उचित मूल्य दुकानें खोलने को प्रोत्साहित कर रही है। अगस्त 2025 तक 11 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं और 500+ PACS चिन्हित किए गए हैं।

भविष्य की नींव: साइलो और परिसंपत्ति मुद्रीकरण
मोदी सरकार अब स्टील साइलो, यानी अत्याधुनिक, पूर्णतः स्वचालित भंडारण ढांचे पर फोकस कर रही है।
*48 लोकेशनों पर 27.75 लाख मीट्रिक टन क्षमता के साइलो बनकर तैयार हैं।
*87 स्थानों पर निर्माण जारी है।
*और 54 जगहों पर टेंडरिंग प्रक्रिया चालू है।
साथ ही, FCI की खाली ज़मीन का उपयोग करके 17.47 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए गोदाम भी बन रहे हैं।

अब अनाज सिर्फ उपज नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संपदा है
मोदी सरकार की नीतियाँ यह साबित करती हैं कि भंडारण अब कोई बैकएंड प्रक्रिया नहीं, बल्कि कृषि नीति का केंद्रबिंदु है। जब भंडारण सशक्त होता है, तो किसान को उसकी मेहनत की सही कीमत मिलती है, उपभोक्ता तक गुणवत्ता वाला अनाज पहुँचता है और देश में साल भर खाद्य सुरक्षा बनी रहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में भारत ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है —"किसान का पसीना अब सिर्फ मिट्टी नहीं सींचेगा, वो अब हर दाने में समृद्धि उगाएगा।"

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