ग्लोबल स्टेज पर 'मोदी मैजिक': 21 विदेशी संसदों में गूंजी भारत की आवाज, बना नया रिकॉर्ड

दुनिया के सबसे लोकप्रिय राजनेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी सरजमीं पर एक नया इतिहास रच दिया है। हाल ही में इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करने के साथ ही उन्होंने विदेशी संसदों में भाषण देने का अपना 21वां आंकड़ा छू लिया है। यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि दुनिया के नक्शे पर भारत की बढ़ती धमक का

जीता-जागता सबूत है। प्रधानमंत्री मोदी के इस ऐतिहासिक सफर की शुरुआत साल 2014 में पड़ोसी देश भूटान से हुई थी। इसके बाद नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फिजी जैसी संसदों में उनकी आवाज गूंजी। 2015 में उन्होंने मॉरीशस, श्रीलंका, मंगोलिया, ब्रिटेन और अफगानिस्तान की संसदों को संबोधित किया। 2016 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित कर उन्होंने भारत-अमेरिका रिश्तों की नई नींव रखी। यह सिलसिला यही नहीं थमा, 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव और 2023 में दोबारा अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित कर उन्होंने नया कीर्तिमान बनाया। हाल के वर्षों में गुयाना, घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, नामीबिया, इथियोपिया, इजराइल, सेशेल्स और अब 2026 में इंडोनेशियाई संसद में उनका संबोधन बेहद ऐतिहासिक रहा।

PM Modi at Seychelles parliament

एक नजर डालते है कि पीएम मोदी नेअब तक किन-किन देशों की संसद को संबोधित किया है…


21वां संबोधन (07 जुलाई 2026, इंडोनेशियाई संसद)
प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत-इंडोनेशिया संबंधों को साझा इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और समुद्री साझेदारी पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समुद्र कभी दूरी नहीं, बल्कि जुड़ाव का सेतु रहा है। पीएम मोदी ने रामायण, महाभारत, नालंदा, गरुड़ और बोरोबुदुर का उल्लेख करते हुए रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का आह्वान किया। भाषण के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक, समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, साइबर सुरक्षा और व्यापार में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और ब्रिक्स मंच पर सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए ‘गंगा–महाकाम विजन’ प्रस्तुत किया। इस विजन के तहत सभ्यतागत जुड़ाव, साझा विकास, रणनीतिक विश्वास, समुद्री समृद्धि और ग्लोबल साउथ की साझी आवाज को भविष्य की साझेदारी के पांच प्रमुख स्तंभ बताया।

20वां संबोधन (28 जून 2026, सेशेल्स की नेशनल असेंबली)
प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए भारत और सेशेल्स के रिश्तों को भरोसे, साझेदारी और साझा भविष्य की मजबूत मिसाल बताया। वे इस सदन को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों को अलग नहीं करता, बल्कि जोड़ता है। पीएम मोदी ने सेशेल्स की सांस्कृतिक विविधता की सराहना करते हुए क्रियोल संस्कृति, मौत्या नृत्य के साथ-साथ समोसा, गरबा, दीपावली और थाई पोंगल जैसे भारतीय प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी है और 'महासागर' विजन के जरिए भारत और सेशेल्स मिलकर हिंद महासागर को सुरक्षित, समृद्ध और स्थिर बनाएंगे।

 

19वां संबोधन (25 फरवरी 2026, इजरायली संसद नेसेट)
प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल की संसद ‘नेसेट’ के विशेष सत्र को संबोधित कर नया इतिहास रचा। वे इजराइली संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। नेसेट पहुंचने पर अध्यक्ष अमीर ओहाना, पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के नेता यायर लापिद ने उनका स्वागत किया। पूरी संसद भारतीय तिरंगे की रोशनी से जगमगा रही थी। पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘शालोम’ और ‘नमस्ते’ से की। भाषण का सबसे भावुक हिस्सा 7 अक्टूबर के हमास हमले पर संवेदना व्यक्त करना था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने दोनों देशों के त्योहारों जैसे दीवाली-हनुक्का और होली-पुरिम की समानताएं गिनाईं और इजराइल में काम कर रहे भारतीय केयरगिवर्स को 'लिविंग ब्रिज' बताया।

 

18वां संबोधन (17 दिसंबर 2025, इथियोपिया संसद)
इथियोपिया की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीका को 21वीं सदी की वैश्विक विकास यात्रा का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अफ्रीका का संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, संघर्ष और भविष्य की आकांक्षाओं से जुड़ा है। पीएम मोदी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षमता निर्माण में भारत की साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अफ्रीका के साथ शोषण के बजाय सहयोग के मॉडल पर आगे बढ़ता है।

 

17वां संबोधन (9 जुलाई 2025, नामीबिया संसद)
नामीबिया की संसद में अपने ऐतिहासिक संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र, प्राकृतिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग और सतत विकास पर भारत का दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भारत और नामीबिया दोनों ने उपनिवेशवाद का दंश झेला है, जो उन्हें नैतिक वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाता है। पीएम मोदी ने खनिज, ऊर्जा और कौशल विकास में सहयोग को भविष्य की साझेदारी का आधार बताया। उन्होंने दोनों देशों को कौशल विकास और परस्पर सहयोग का मजबूत साझेदार करार दिया।

 

16वां संबोधन (4 जुलाई 2025, त्रिनिदाद और टोबैगो संसद)
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में प्रवासी भारतीय समुदाय को भारत और कैरेबियन देशों के बीच एक जीवंत सेतु बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजते हुए इन देशों के विकास में अहम योगदान दिया है। पीएम मोदी ने लोकतंत्र, सांस्कृतिक विविधता और विकास साझेदारी को भारत-त्रिनिदाद संबंधों की रीढ़ बताया।

 

15वां संबोधन (3 जुलाई 2025, घाना संसद)
घाना की संसद में प्रधानमंत्री ने अफ्रीका के साथ भारत के रिश्तों को “सम्मान, समानता और विश्वास” पर आधारित बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत की अफ्रीका नीति संसाधन दोहन की नहीं, बल्कि मानव विकास की है। डिजिटल इंडिया, यूपीआई, स्वास्थ्य और वैक्सीन सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारत को ग्लोबल साउथ की सशक्त आवाज के रूप में प्रस्तुत किया।

 

14वां संबोधन (21 नवंबर 2024, गयाना संसद)
गयाना की संसद में संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने प्रवासी भारतीयों के संघर्ष, योगदान और उपलब्धियों को सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि गयाना जैसे देशों में बसे भारतीय मूल के लोग भारत की सांस्कृतिक शक्ति हैं। उन्होंने ऊर्जा, कृषि और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की तकनीकी साझेदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया।

 

13वां संबोधन (23 जून 2023, अमेरिकी कांग्रेस - दूसरा संबोधन)
प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” और “फ्यूचर रेडी नेशन” बताया। उन्होंने भारत के डिजिटल परिवर्तन, स्टार्टअप इकोसिस्टम और युवा शक्ति का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए निर्णायक है।

 

12वां संबोधन (8 जून 2019, मालदीव संसद)
मालदीव की संसद में पीएम मोदी ने लोकतंत्र की बहाली का स्वागत करते हुए भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत मालदीव की संप्रभुता और स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। समुद्री सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों के बीच संपर्क इस संबोधन के प्रमुख विषय रहे।

 

11वां संबोधन (जुलाई 2018, युगांडा संसद)
युगांडा की संसद में संबोधन करते हुए प्रधानमंत्री ने अफ्रीका को भारत का रणनीतिक और भावनात्मक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका के विकास में बिना शर्त सहयोग करता है। उन्होंने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक असमानता जैसे मुद्दों पर साझा संघर्ष का आह्वान किया।

 

10वां संबोधन (8 जून 2016, अमेरिकी कांग्रेस - पहला संबोधन)
अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र में अपने पहले संबोधन में पीएम मोदी ने लोकतंत्र, विविधता और स्वतंत्रता को भारत-अमेरिका संबंधों की आत्मा बताया।उन्होंने भारत को अवसरों और नवाचार की भूमि के रूप में प्रस्तुत किया और दोनों देशों को 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी बताया।

 

9वां संबोधन (25 दिसंबर 2015, अफगानिस्तान संसद)
अफगानिस्तान की संसद में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सशक्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत, अफगानिस्तान की शांति, स्थिरता और पुनर्निर्माण में मजबूती से खड़ा है। यह भाषण भारत की साहसी और सिद्धांत-आधारित विदेश नीति का प्रतीक बना।

 

8वां संबोधन (12 नवंबर 2015, ब्रिटिश संसद)
वेस्टमिंस्टर हॉल में दिए गए संबोधन में पीएम मोदी ने भारत-ब्रिटेन संबंधों के औपनिवेशिक अतीत को स्वीकार करते हुए भविष्य की समान भागीदारी की बात कही। उन्होंने महात्मा गांधी की ब्रिटिश संसद के बाहर प्रतिमा को साझा मूल्यों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश इतिहास की ताकत से सीख लेकर, आपसी समझ और सम्मान के साथ भविष्य के रिश्तों को और मजबूत बना सकते हैं।

 

7वां संबोधन (17 मई 2015, मंगोलिया संसद)
मंगोलिया की संसद में प्रधानमंत्री ने इस देश को भारत का “आध्यात्मिक पड़ोसी” बताया। उन्होंने साझा बौद्ध विरासत, सांस्कृतिक संपर्कों और सदियों पुराने मानवीय रिश्तों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं।

 

6वां संबोधन (12 मार्च 2015, मॉरीशस संसद)
मॉरीशस की राष्ट्रीय असेंबली में पीएम मोदी ने गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया। महात्मा गांधी के दांडी मार्च और मॉरीशस के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र करते हुए उन्होंने साझा लोकतांत्रिक विरासत की सराहना की। उन्होंने मॉरीशस को हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि का महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

 

5वां संबोधन (13 मार्च 2015, श्रीलंका संसद)
श्रीलंका की संसद में पीएम मोदी ने लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय मेल-मिलाप और समावेशी विकास पर बल दिया। उन्होंने तमिल समुदाय सहित सभी वर्गों के सशक्तिकरण की आवश्यकता बताई। बोधगया से अनुराधापुरा तक की साझा बौद्ध विरासत और रामायण परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने पड़ोस को साझा भविष्य की कुंजी बताया।

 

चौथा संबोधन (19 नवंबर 2014, फिजी संसद)
फिजी संसद में संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों के संघर्ष और योगदान को भावनात्मक शब्दों में याद किया। जलवायु परिवर्तन, डिजिटल सहयोग और विकास साझेदारी इस भाषण के प्रमुख बिंदु रहे।

 

तीसरा संबोधन (18 नवंबर 2014, ऑस्ट्रेलिया संसद)
ऑस्ट्रेलियाई संसद में पीएम मोदी ने साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और रणनीतिक विश्वास पर बल दिया। उन्होंने भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को विस्तार देते हुए ऑस्ट्रेलिया को प्रमुख साझेदार बताया। उन्होंने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए वैश्विक रणनीति बनाने पर जोर दिया और बताया कि भारत पिछले तीन दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है।

 

दूसरा संबोधन (3 अगस्त 2014, नेपाल संविधान सभा)
नेपाल की संविधान सभा में प्रधानमंत्री ने कहा कि एक मजबूत नेपाल पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए आवश्यक है। उन्होंने नेपाल के संविधान को वेद-उपनिषदों जैसी दूरदृष्टि वाला दस्तावेज बताया जो "ऋषि-मन" से निर्मित होने के योग्य है। उन्होंने "युद्ध से बुद्ध" के मार्ग को रेखांकित करते हुए नेपाल के उज्ज्वल और लोकतांत्रिक भविष्य की कामना की।

 

पहला संबोधन (16 जून 2014, भूटान संसद)
प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले विदेश दौरे पर भूटान संसद को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने “भारत फॉर भूटान, भूटान फॉर भारत” का सिद्धांत दिया। उन्होंने जलविद्युत, पर्यावरण, युवा सहयोग और पर्यटन को दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत आधारशिला बताया।

Comments

Popular posts from this blog

Global Economic Growth: IMF Report में भारत ने अमेरिका को पछाड़ा

राहुल गांधी के नेतृत्व में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का पतन, क्या वे पार्टी के लिए अभिशाप बन गए हैं?

भारत को AI की ग्लोबल ताकत बनाने की तैयारी